पंचायत निधि में गड़बड़ी का आरोप, हाई मास्ट लाइट लगाने के नाम पर बार-बार निकली निविदा
- By UP Samachaar Plus --
- Friday 03 Oct, 2025
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महराजगंज। सिसवा ब्लॉक के ग्राम पंचायत लक्ष्मीपुर एकडंगा में पंचायत निधियों के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम सचिव पवन कुमार गुप्ता और ग्राम प्रधान अमेरिका पर आरोप है कि उन्होंने एक ही कार्य—ग्राम पंचायत में हाई मास्ट लाइट स्थापना—के लिए बार-बार निविदा निकालकर पंचायत निधि का गलत इस्तेमाल किया।
दो बार निकली निविदा, काम फिर भी अधूरा
शिकायत के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में प्रकाशित निविदा (अल्पकालीन निविदा सूचना सं. 01/2023-24, दिनांक 11 जून 2023) के क्रमांक 4 में हाई मास्ट लाइट लगाने का कार्य 36.37 लाख रुपये की अनुमानित लागत से शामिल किया गया था। लेकिन आज तक ग्राम पंचायत में हाई मास्ट लाइट स्थापित नहीं की गई।
इसके बावजूद, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए फिर से प्रकाशित निविदा (अल्पकालीन निविदा सूचना सं. 01/2025-2026, दिनांक 11 जुलाई 2025) के क्रमांक 13 में उसी कार्य को, उसी लागत के साथ, दोबारा निविदा में शामिल कर लिया गया।
ग्रामवासियों का आरोप है कि न तो 2023-24 की निविदा को विधिवत निरस्त किया गया और न ही उसका कोई लेखा-जोखा सार्वजनिक किया गया। फिर भी उसी कार्य को 2025-26 में दोबारा निविदा में डाल दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का सीधा मामला है।
हाई मास्ट लाइट न होने से हादसा
ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में गांव में अंधेरे के कारण एक गंभीर घटना घटित हुई। चोरी की अफवाह फैलने के बाद कुछ लोगों ने अंधेरे में फायरिंग कर दी, जिसमें गांव की कुछ लड़कियां गंभीर रूप से घायल हो गईं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था—खासतौर पर हाई मास्ट लाइट—होती, तो इस तरह की घटना रोकी जा सकती थी।
सचिव का बयान संदेह के घेरे में
इस संबंध में जब ग्राम सचिव पवन गुप्ता से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, “टेंडर पहले अखबार में प्रकाशित किया गया था, लेकिन जब उसे निरस्त किया गया तो उसे अखबार में प्रकाशित करने की कोई आवश्यकता नहीं थी, इसलिए उसका प्रकाशन नहीं कराया गया।”
उनका यह बयान ग्रामीणों और जानकारों को संतोषजनक नहीं लगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई टेंडर अखबार में प्रकाशित होता है और किसी कारणवश निरस्त किया जाता है, तो उसका निरस्तीकरण भी अखबार में प्रकाशित करना नियमानुसार अनिवार्य है। यहां ऐसा न करना संदेह पैदा करता है और पूरे मामले को गोलमाल बनाता है।
पंचायती राज अधिकारी का बयान
वहीं, जिला पंचायती राज अधिकारी ने कहा, “पत्रावली की जांच कर ही कुछ बताया जा सकता है। टेंडर इतनी आसानी से नहीं निकलती है।” लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि टेंडर इतनी आसानी से नहीं निकलती, तो फिर एक ही कार्य के लिए निविदा बार-बार क्यों निकाली जा रही है और बिना किसी स्पष्टीकरण के निरस्त क्यों कर दी गई?
ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला डबल टेंडरिंग और वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है। उनका आरोप है कि सचिव और प्रधान की मिलीभगत से एक ही कार्य दिखाकर बार-बार निविदा निकाली जा रही है, जबकि धरातल पर काम नहीं हो रहा।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि—
1. दोनों निविदाओं की पूर्ण जानकारी (आदेश, स्वीकृति, भुगतान विवरण, कार्य निष्पादन की स्थिति) सार्वजनिक की जाए।
2. यदि 2023-24 की निविदा के तहत भुगतान हुआ है तो उसका भौतिक सत्यापन कराया जाए।
3. एक ही कार्य को बार-बार निविदा में शामिल करने का कारण स्पष्ट किया जाए।
4. जिम्मेदार अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता की जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए।
किस तरह का भ्रष्टाचार?
यह मामला स्थानीय स्तर पर होने वाले पंचायत घोटालों का उदाहरण है। पहले निविदा निकालकर कार्य दिखाया जाता है। भुगतान का रास्ता बनाया जाता है लेकिन काम अधूरा छोड़ दिया जाता है। कुछ साल बाद उसी कार्य को फिर से निविदा में डाल दिया जाता है। इसी प्रक्रिया से करोड़ों की पंचायत निधियां कागजों में खर्च दिखाई जाती हैं, जबकि जमीनी स्तर पर काम अधूरा रहता है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष व पारदर्शी जांच हो, ताकि पंचायत निधियों की लूट पर रोक लग सके।
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