गणतंत्र दिवस पर मनरेगा में काम दिखाना सवालों के घेरे में, तीन ब्लॉकों में मजदूरों की हाजिरी अपलोड
- By UP Samachaar Plus --
- Monday 26 Jan, 2026
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महराजगंज। जहां पूरा देश 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस का उत्सव मना रहा था, वहीं महराजगंज जनपद के सिसवा, फरेंदा और परतावल ब्लॉक में मनरेगा कार्य कराए जाने का दावा कर मजदूरों की हाजिरी और फोटो ऑनलाइन अपलोड की गई। यह मामला सामने आने के बाद मनरेगा के नियमों और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जो बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
मनरेगा दिशा-निर्देशों के अनुसार राष्ट्रीय अवकाश के दिन किसी भी प्रकार का श्रम कार्य कराना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद 26 जनवरी जैसे विशेष राष्ट्रीय पर्व पर तीन अलग-अलग ब्लॉकों में कार्य दिखाया जाना न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि यह संदेह भी पैदा करता है कि क्या यह कार्य वास्तव में हुआ या सिर्फ कागजों और पोर्टल तक सीमित रहा।
परतावल ब्लॉक अंतर्गत ग्राम अहिरौली में 30 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई। यहां नरेश यादव के खेत से संगम पटेल के खेत तक नाली सफाई कार्य दिखाया गया है।
वहीं सिसवा ब्लॉक के ग्राम पंचायत गोपाला में कुल 96 मजदूरों की हाजिरी दर्ज की गई। विवरण के अनुसार,
शिव के खेत से हिरने नदी तक नाली सफाई कार्य में 50 मजदूर,
विमल के खेत से हिरने नदी तक नाली सफाई कार्य में 46 मजदूरों की उपस्थिति दर्शाई गई है।
इसी तरह फरेंदा ब्लॉक के मधुकरपुर महदेवा गांव में गौ सदन के बाउंड्री वॉल निर्माण कार्य में 21 मजदूरों की हाजिरी अपलोड की गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पूरे जनपद में केवल यही तीन ब्लॉक हैं, जहां 26 जनवरी को भी मनरेगा कार्य कराया गया? यदि नहीं, तो फिर इन्हीं ब्लॉकों में ही कार्य दिखाए जाने के पीछे क्या वजह है।
इस प्रकरण में जब सिसवा ब्लॉक के एपीओ सौरभ चौधरी से सवाल किया गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि “यह बिल्कुल गलत है। मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”
वहीं परतावल ब्लॉक के एपीओ से जब इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने पहले गोलमटोल जवाब दिया, लेकिन जब नियमों की जानकारी दी गई तो उन्होंने भी जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की बात कही।
जबकि फरेंदा ब्लॉक के एपीओ से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सब बिना ब्लॉक स्तर की जानकारी के संभव है?
क्या इसमें रोजगार सेवक, ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव और ब्लॉक कर्मचारियों की मिलीभगत तो नहीं है?
यदि 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्व पर कार्य कराना नियम विरुद्ध है, तो फिर हाजिरी और फोटो किसके आदेश पर अपलोड किए गए?
यह मामला सिर्फ नियम उल्लंघन का नहीं, बल्कि मनरेगा में पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन जांच के बाद वास्तविक दोषियों तक पहुंच पाता है या मामला केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रह जाता है।

