फीस की मनमानी पर डीएम का बड़ा प्रहार, स्कूलों को चेतावनी—अब नहीं चलेगी लूट
- By UP Samachaar Plus --
- Thursday 09 Apr, 2026
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महराजगंज। जनपद में निजी विद्यालयों की बेलगाम फीस वसूली, ड्रेस और किताबों के नाम पर अभिभावकों की जेब ढीली कराने के खेल पर प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में स्कूल प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को स्पष्ट संदेश दे दिया गया—अब नियमों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।
बैठक में डीएम ने उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 व संशोधन अधिनियम, 2020 का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से अभिभावकों की शिकायतें मिल रही थीं कि विद्यालय मनमाने ढंग से फीस बढ़ा रहे हैं और अनावश्यक खर्च थोप रहे हैं, जिसे अब हर हाल में रोका जाएगा।
डीएम ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी वित्तविहीन विद्यालयों को निर्देश दिया कि वे पिछले पांच वर्षों का फीस विवरण, ड्रेस और पुस्तकों की पूरी जानकारी अपनी वेबसाइट और सूचना पट्ट पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करें। उन्होंने साफ किया कि जानकारी छिपाने वाले विद्यालय सीधे कार्रवाई की जद में आएंगे।
इसी क्रम में स्कूलों की जांच के लिए त्रिसदस्यीय समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस समिति में नायब तहसीलदार, खंड शिक्षा अधिकारी और राजकीय विद्यालय के प्रधानाचार्य शामिल होंगे, जो विद्यालयों की फीस संरचना, ड्रेस और किताबों की वास्तविक स्थिति की जांच करेंगे। जांच रिपोर्ट सीधे जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी, जिससे किसी स्तर पर गड़बड़ी छिप न सके।
सबसे अहम मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए डीएम ने कहा कि कोई भी विद्यालय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) + 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकता। यदि जांच में इससे अधिक बढ़ोतरी पाई गई तो संबंधित विद्यालयों से जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा जवाब-तलब किया जाएगा और अतिरिक्त फीस को कम कर भविष्य की फीस में समायोजित कराया जाएगा।
ड्रेस और किताबों के नाम पर हो रहे शोषण पर भी प्रशासन ने कड़ा प्रहार किया है। डीएम ने निर्देश दिया कि पांच लगातार शैक्षणिक वर्षों के भीतर स्कूल यूनिफॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। साथ ही किसी भी विद्यालय को यह अधिकार नहीं होगा कि वह किसी एक दुकान से किताब, कॉपी या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाए या स्वयं इनकी बिक्री करे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल मान्यता प्राप्त पुस्तकों का ही संचालन होगा और जिन सुविधाओं का संचालन विद्यालय द्वारा नहीं किया जा रहा है, उनका शुल्क वसूलना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। ऐसे मामलों में शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि आदेशों का जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और अभिभावकों का भरोसा कायम रह सके।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक पी.के. शर्मा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ऋद्धि पांडेय, एआरटीओ मनोज सिंह सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।

