मनरेगा में एक ही व्यक्ति को दो बार व्यक्तिगत लाभ देने का मामला, बीडीओ परतावल से मांगी स्पष्टीकरण
- By UP Samachaar Plus --
- Saturday 31 Oct, 2026
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उपायुक्त श्रम रोजगार ने बीडीओ परतावल से मांगी स्पष्टीकरण सहित स्पष्ट जांच आख्या, शिकायतकर्ता पर कार्रवाई की मांग ने भी खड़े किए सवाल !
महराजगंज। मनरेगा योजना के तहत एक ही व्यक्ति को अलग-अलग वित्तीय वर्षों में दो बार व्यक्तिगत लाभ दिए जाने का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। प्रकरण में जांच आख्या और अधिकारियों की ओर से भेजे गए जवाब में विरोधाभास सामने आने के बाद उपायुक्त (श्रम रोजगार) ने खंड विकास अधिकारी परतावल से दोबारा स्पष्ट जांच आख्या तलब की है। वहीं, इसी प्रकरण में शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग किए जाने से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
मामला विकास खंड परतावल की ग्राम पंचायत महम्मदा से जुड़ा है। आईजीआरएस के तहत की गई शिकायत की जांच में सामने आया कि ग्राम पंचायत की कार्ययोजना में विनोद पुत्र गुलाबचन्द्र के नाम से दो अलग-अलग कार्य दर्ज हैं। इनमें वित्तीय वर्ष 2024-25 में विनोद के बगीचे का समतलीकरण और वित्तीय वर्ष 2025-26 में विनोद पुत्र गुलाबचन्द्र के नाम से व्यक्तिगत तालाब निर्माण का कार्य शामिल है।
इस संबंध में खंड विकास अधिकारी परतावल की ओर से भेजे गए जवाब में शिकायत को निराधार बताया गया। लेकिन जांच आख्या में ही एक व्यक्ति को अलग-अलग वित्तीय वर्षों में दो बार व्यक्तिगत लाभ दिए जाने का उल्लेख होने से अधिकारियों के जवाब और जांच के तथ्यों में विरोधाभास सामने आ गया।
इसी विरोधाभास को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त श्रम रोजगार गौरवेंद्र सिंह ने दिनांक 31 अक्टूबर को खंड विकास अधिकारी कृष्णकान्त शुक्ला को पत्र भेजकर जांच आख्या के तथ्यों का परीक्षण कर स्पष्ट रिपोर्ट लौटती डाक से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। पत्र की प्रतिलिपि मुख्य विकास अधिकारी को भी अवलोकनार्थ भेजी गई है।
शिकायतकर्ता पर कार्रवाई की मांग से बढ़ा विवाद !
इस पूरे प्रकरण में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। शिकायतकर्ता अजीत कुमार के खिलाफ भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि वह विकास कार्यों को बाधित करने और योजना की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से भ्रामक शिकायत कर रहे हैं। पत्र में उनकी शिकायत को निरस्त करने के साथ ही शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने के आरोप में उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई करने पर विचार करने का अनुरोध किया गया है।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब जांच आख्या में एक ही व्यक्ति को दो अलग-अलग वित्तीय वर्षों में व्यक्तिगत लाभ दिए जाने का उल्लेख है तो फिर शिकायत को पूरी तरह निराधार कैसे बताया गया? यदि जांच में अनियमितता के संकेत मिले हैं तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और जब शिकायत के तथ्यों पर ही विभागीय स्तर पर दोबारा परीक्षण की जरूरत महसूस की गई है, तो शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई की मांग का औचित्य क्या है?
साक्ष्यों और शपथपत्रों के बावजूद कार्रवाई का इंतजार ?
शिकायतकर्ता की ओर से पहले भी मामले में साक्ष्य और शपथपत्र प्रस्तुत किए जाने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद जांच रिपोर्टों पर सवाल उठते रहे हैं। अब विभाग के उच्चाधिकारी द्वारा स्वयं जांच आख्या में एकरूपता नहीं होने की बात स्वीकार करते हुए दोबारा रिपोर्ट मांगना मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
फिलहाल निगाहें बीडीओ परतावल की नई जांच आख्या और विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं। बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मामले में वास्तविक अनियमितता की जिम्मेदारी तय होगी या शिकायतकर्ता पर कार्रवाई की मांग के बीच मूल शिकायत ही उलझकर रह जाएगी?

